इश्क़ & धोखेबाजी..
मैनें भी अपने दिल में, एक तस्वीर बनाया था
लाख मना करने पर भी, उसको ही हीर बनाया था
प्यार नही था उसको फिर भी, मुझे देख मुस्काई थी
रस चूस कर मेरा, मुझको डूबने छोड़ कर आई थी
हुई पार जब दरिया तो, एक अनजाना टकराया था
छोड़ डूबता दरिया में, औरो संग रास रचाया था
हुई शर्मशार जमाने में, सिर्फ एक ही ख्याल आया था
इस बेदर्द जमाने में उसने, एक सच्चा रांझा ठुकराया था..
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