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Showing posts from February, 2021

अल्फ़ाज

  मैं लेखक नही, बतौर इंसान कहता हूँ। अपने कलेजे का अल्फ़ाज कहता हूँ।।
  उसकी वो प्यारी से मुस्कान याद मुझे आज भी है उसका वो खिलखिला के हँसना याद मुझे आज भी है ऑटो में बैठ के लगाई थी जो मेहंदी मेरे पैंट में उसका दाग आज भी है।।
     लगी होगी बद्दुआ हमें भी किसी की। अनजाने न जाने कितनों के दिल तोड़े होंगे।।