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तेरी याद!!!

 


तुझसे लिपट कर रोने की ख्वाइश है, बिछड़ जाने से पहले

हा.. एक बार लौट आ, तू लौट आ, मेरे टूट जाने से पहले

बतसूरत सा हो गया हूं, तेरे रूठ जाने के बाद

आ मुझें महका दे, मेरे सूख जाने से पहले

उलझनों में कट रही रातें मेरी, अब नींद कहाँ?

हो सके तो बचा ले, मेरे खत्म हो जाने से पहले

वक़्त है!,अवसर है!,मोहब्बत भी, बस तू आ जा..

कहीं वक़्त ही न निकल जाए, तेरे आने से पहले।।

             ©सूरज सिंह
            

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दोस्तो आप सबका बहुत बहुत स्वागत है.. मैं यहाँ हर रोज आप लोगों को कुछ नई-नई मुक्तक (शायरी) सुनाता रहूंगा.. अच्छा लगे तो लाइक कमेंट जरूर करे। बस यू ही अपने नगमे गाता रहता हूं कलेजे का दर्द कलम से मिटाता रहता हूं जख्मों के लिए तू कुसूरवार न ठहराई जाए आसुंओं से, तेरे उंगलियों के निशान मिटाता रहता हूं

अल्फ़ाज

  मैं लेखक नही, बतौर इंसान कहता हूँ। अपने कलेजे का अल्फ़ाज कहता हूँ।।