तुझसे लिपट कर रोने की ख्वाइश है, बिछड़ जाने से पहले
हा.. एक बार लौट आ, तू लौट आ, मेरे टूट जाने से पहले
बतसूरत सा हो गया हूं, तेरे रूठ जाने के बाद
आ मुझें महका दे, मेरे सूख जाने से पहले
उलझनों में कट रही रातें मेरी, अब नींद कहाँ?
हो सके तो बचा ले, मेरे खत्म हो जाने से पहले
वक़्त है!,अवसर है!,मोहब्बत भी, बस तू आ जा..
कहीं वक़्त ही न निकल जाए, तेरे आने से पहले।।
©सूरज सिंह

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