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सुकून की तलाश में एक सच्चा आशिक़!

 




दिल-ए-मोहब्बत सिर्फ एक से किया

सिर्फ एक को ही ये दिल अपनाना चाहे

चलते चलते थक गया है ये मुसाफिर

ये भी किसी के बाहों का ठिकाना चाहे।

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दोस्तो आप सबका बहुत बहुत स्वागत है.. मैं यहाँ हर रोज आप लोगों को कुछ नई-नई मुक्तक (शायरी) सुनाता रहूंगा.. अच्छा लगे तो लाइक कमेंट जरूर करे। बस यू ही अपने नगमे गाता रहता हूं कलेजे का दर्द कलम से मिटाता रहता हूं जख्मों के लिए तू कुसूरवार न ठहराई जाए आसुंओं से, तेरे उंगलियों के निशान मिटाता रहता हूं

अल्फ़ाज

  मैं लेखक नही, बतौर इंसान कहता हूँ। अपने कलेजे का अल्फ़ाज कहता हूँ।।