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लगी होगी बद्दुआ हमें भी किसी की।

अनजाने न जाने कितनों के दिल तोड़े होंगे।।

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इश्क़ & धोखेबाजी.. मैनें भी अपने दिल में, एक तस्वीर बनाया था लाख मना करने पर भी, उसको ही हीर बनाया था प्यार नही था उसको फिर भी, मुझे देख मुस्काई थी रस चूस कर मेरा, मुझको डूबने छोड़ कर आई थी हुई पार जब दरिया तो, एक अनजाना टकराया था छोड़ डूबता दरिया में, औरो संग रास रचाया था हुई शर्मशार जमाने में, सिर्फ एक ही ख्याल आया था इस बेदर्द जमाने में उसने, एक सच्चा रांझा ठुकराया था..
दोस्तो आप सबका बहुत बहुत स्वागत है.. मैं यहाँ हर रोज आप लोगों को कुछ नई-नई मुक्तक (शायरी) सुनाता रहूंगा.. अच्छा लगे तो लाइक कमेंट जरूर करे। बस यू ही अपने नगमे गाता रहता हूं कलेजे का दर्द कलम से मिटाता रहता हूं जख्मों के लिए तू कुसूरवार न ठहराई जाए आसुंओं से, तेरे उंगलियों के निशान मिटाता रहता हूं
एक तरफा मोहब्बत! जज्बातो को दिल में अपने दबायें रखते है तुमसे मोहब्बत है कितनी, हम छुपाये रखते है गलत न ठहर जाऊ तुम्हारी नजरों में इसीलिए तिरछी नजरें तुम पर गिरायें रहते है।